शुक्रवार, फ़रवरी 10

यह रात बिलखना बंद कर देगी...

इक दिन वो भी आएगा.., कि यह अँधेरा ढल जाएगा..,
यह रात बिलखना बंद कर देगी., नया सवेरा मुस्काएगा..!!
मैं चलता रहा ठिठकने तक कदमों के, मंज़िल की मुझको चाहत न रही..,
रुक जाना मेरी आदत न थी., मंज़िल पाने की मुझे हसरत न रही..!!
जाने मगर क्यूँ सफर मेरा नित अंधेरों से ही गुज़रता रहा..,
आग बन कर उजाला., जाने क्यूँ मेरे भीतर ही सुलगता रहा..!!
है विश्वास मगर फिर भी अटल., यह दौर गुज़र ही जाएगा..,
यह रात बिलखना बंद कर देगी., नया सवेरा मुस्काएगा..!! 

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