शुक्रवार, फ़रवरी 10

माँ तो बस माँ होती है..

हर इंसान की ज़िन्दगी में वो एक निर्णायक पल ज़रूर आता है जब उसे बड़ा होना पड़ता है., बच्चे से..! और उस  पल में तुरंत वो महसूस करता है कि "माँ" का उसकी ज़िन्दगी में क्या महत्व है., और उसका  रुतबा भगवान जितना क्यूँ बताया जाता है..!
मेरी ज़िन्दगी में यह पल दो-दो बार आया.. एक बार जब मैं महज़ दस साल का था और मुझे पढ़ाई के लिए हॉस्टल जाना पड़ा.., और दूसरी बार जब उच्चतर शिक्षा के लिए मैं दिल्ली आया..! हॉस्टल में दसवीं की पढ़ाई खत्म कर के मैं घर आ गया.. फिर आगे कि स्कूलिंग मैंने घर से ही की..! तब मैंने महसूस किया कि जब मैं मम्मी से दूर रह कर हॉस्टल में पढ़ता था तो मैं जाने कैसे बड़ा हो गया था.., और वापिस आते ही मैं एक समझदार लड़के की जगह एक दुलारे बच्चे में तब्दील हो चुका था.!
फिर बारहवीं की पढ़ाई खत्म हुई और आगे की पढ़ाई के लिए मेरा दिल्ली आना तय हुआ... मम्मी उस वक्त भी उतनी ही चिंतित थी जितनी कि मुझे हॉस्टल भेजते वक्त., जबकि अब वो दस साल का मासूम बच्चा लगभग छः फीट का युवक हो चुका था.. और मैं भी न जाने क्यूँ खुद को मम्मी के सामने बच्चा सा महसूस कर रहा था..!
खैर., मैं दिल्ली  आ गया..! गाज़ियाबाद के एक कॉलेज में दाखिला भी ले लिया.. तब महसूस किया कि जब तक मैं मम्मी के पास हुआ करता हूँ., मैं बच्चा ही होता हूँ.. और यह हर इन्सान पर लागू होता है.. चाहे फिर वो  बच्चा हो, किशोर, युवक अथवा अधेड़ ही क्यूँ न हो.., माँ के आगे हमेशा इन्सान बच्चा ही रहता है क्यूँ कि- "माँ तो बस माँ होती है.."


माँ तुम्हारी गोद में पलना,
तुम्हारी ममता की छाँव में बिताया वो ज़माना याद आता है..!
सर्द मौसम में रजाई के भीतर,
तुम्हारे हाथों का बना गर्म खाना याद आता है..!!

यहाँ न तो वो सर्द मौसम है और न ही वो रजाई..,
फिर भी क्यूँ मुझे तुम्हारे हाथ का खाना याद आता है..!
रोता हूँ जब तनहाई में, छुप कर दुनिया से मैं..,
तो मुझे रोते से वो तुम्हारा हँसाना याद आता है..!!

तेरी गोदी में बिताया हर लम्हा, तेरी ममता के साये में बिताया हर पल..,
और तेरे प्यार की छाँव में बिताया, बचपन का ज़माना याद आता है..!
मेरी शरारतें, लोगों की शिकायतें, तेरी हिदायतें, तेरी वो मार, जिसमें होता था प्यार..,
मुझे मार कर तुम्हारा वो पछताना याद आता है..!!

ज़िन्दगी के कुछ कठिन लम्हे, कुछ विषम पहलू,
ज़िन्दगी की धूप से तुम्हारा., मुझको बचाना याद आता है..! 
माँ., कभी-कभी बहुत तरस जाता हूँ, तेरे दीदार के लिए, दुनिया के सबसे प्यारे प्यार के लिए..,
घर की हर खूबी., तुम्हारा हर अफसाना याद आता है..!!

कभी-कभी ठन जाती थी ग़र, किसी बात पर..,
उस हाल में मेरा रूठना और तुम्हारा मनाना याद आता है..!
माँ., न तुम दूर हो मुझसे और न मैं तुमसे, हर पल तुम्हारी नसीहतें मेरे पास हैं और मेरा मन तुम्हारे पास..,
फिर भी न जाने क्यूँ मुझे., तुम्हारी याद का आना याद आता है...!!!





2 टिप्‍पणियां:

पसन्दीदा..